मिले जो कुछ पल तेरे ख्यालों के
मिले वो कुछ पल आसमानों के
देखे जो कुछ ख्वाब तेरे ही आँखों से ..
जब मिले वो कुछ पल तेरे ख्यालों के
था रास्ता छोटा सा अपना
थी डगर भी अनजान वो तो
वो सफर तो मजेदार ही था ..
जब मिले वो कुछ पल तेरे ख्यालों के ...
अब सोचता हूँ ख्वाब ऐसे
ख्वाब के हों अल्फाज़ जैसे
मिले वो ख्वाब तेरे नजारों के ...
जब मिले वो कुछ पल तेरे ख्यालों के ...
मिले वो कुछ पल आसमानों के
देखे जो कुछ ख्वाब तेरे ही आँखों से ..
जब मिले वो कुछ पल तेरे ख्यालों के
था रास्ता छोटा सा अपना
थी डगर भी अनजान वो तो
वो सफर तो मजेदार ही था ..
जब मिले वो कुछ पल तेरे ख्यालों के ...
अब सोचता हूँ ख्वाब ऐसे
ख्वाब के हों अल्फाज़ जैसे
मिले वो ख्वाब तेरे नजारों के ...
जब मिले वो कुछ पल तेरे ख्यालों के ...

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