मुझसे पूछता है मेरा अक्श, तेरा वज़ूद क्या है
है साहिलों पे रहता, तेरा समंदर से रिस्ता ही क्या है
बेवज़ह आसमा की तू करता है बातें …
ज़मीं पे रह के, तेरा ये उड़ने का जुनूँ क्या है …
तू होश-साज़ है या फिर मदहोश आज है
तू राज़-साज़ है या राज़-ए-अयमान है
बेवज़ह करता है तू ख्वाबों की बातें …
खामोश निगाहों से कहने का तेरा ये फितूर क्या है …
है साहिलों पे रहता, तेरा समंदर से रिस्ता ही क्या है
बेवज़ह आसमा की तू करता है बातें …
ज़मीं पे रह के, तेरा ये उड़ने का जुनूँ क्या है …
मुझसे पूछता है मेरा अक्श …
तू होश-साज़ है या फिर मदहोश आज है
तू राज़-साज़ है या राज़-ए-अयमान है
बेवज़ह करता है तू ख्वाबों की बातें …
खामोश निगाहों से कहने का तेरा ये फितूर क्या है …
मुझसे पूछता है मेरा अक्श …
