तुमसे कैसी शिकवा
कुछ पल जो थे तुम साथ चले
तुम दूर गए तो भी याद रहे
तुम याद तो करना भूल गए
पर यादों में तुम साथ रहे
तो कैसे करें तुमसे शिकवा
शिकायत तो है खुद से, ख़्वाबों से ...
तुम बातें बना के रूठ गए
तुम साथ निभाना भूल गए
पलकों को इठला के तुम
आँखें पढ़ पाना चूक गए
तो किस बात पे करें तुमसे शिकवा
शिकायत तो है खुद से, ख्वाबों से ...
उम्मीद ना थी कुछ पाने की
फिर भी ख्वाब हमारे टूट गए
तुमसे न कुछ माँगा था
पर राज़ ये सारे खुल ही गए
तो क्यूँ करें तुमसे शिकवा
शिकायत तो है खुद से, ख़्वाबों से ...
शिकायत तो है खुद से, ख़्वाबों से ...
कुछ पल जो थे तुम साथ चले
तुम दूर गए तो भी याद रहे
तुम याद तो करना भूल गए
पर यादों में तुम साथ रहे
तो कैसे करें तुमसे शिकवा
शिकायत तो है खुद से, ख़्वाबों से ...
तुम बातें बना के रूठ गए
तुम साथ निभाना भूल गए
पलकों को इठला के तुम
आँखें पढ़ पाना चूक गए
तो किस बात पे करें तुमसे शिकवा
शिकायत तो है खुद से, ख्वाबों से ...
उम्मीद ना थी कुछ पाने की
फिर भी ख्वाब हमारे टूट गए
तुमसे न कुछ माँगा था
पर राज़ ये सारे खुल ही गए
तो क्यूँ करें तुमसे शिकवा
शिकायत तो है खुद से, ख़्वाबों से ...
